दो सखियाँ, श्रवण सत्र 1: पत्र में बोलने वाले को पहचानें

प्रेमचंद की ‘दो सखियाँ’ दो मित्रों के पत्रों पर आधारित रचना है। पत्र में हमें किसी घटना का सीधा दृश्य नहीं, उसे बताने वाले व्यक्ति का दृष्टिकोण मिलता है। पहले सत्र में कहानी का निष्कर्ष निकालने से पहले यह समझें कि कौन बोल रहा है और किससे बात कर रहा है।

यह आठ सत्रों की श्रृंखला का सत्र 1 है। इसमें मूल रिकॉर्डिंग के भाग 1 शामिल हैं। यह अकेला सत्र पूरी पुस्तक नहीं है। तेरह मूल भाग आठ सत्रों में क्रम से शामिल हैं; सभी भाग स्रोत पृष्ठ पर भी उपलब्ध हैं।

रिकॉर्डिंग और स्रोत

वाचन: Sonali Ekka. इस सत्र की रिकॉर्डिंग: 5:52.

भाग 1

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सुनने का उद्देश्य

पहली बार समग्र अर्थ के लिए सुनें। दूसरी बार समय सहित नोट बनाएँ। लंबे अंशों में विराम लें। उत्तर का प्रमाण जाँचने के लिए संबंधित स्थान दोबारा सुनें। नीचे के उत्तर किसी अज्ञात घटना का तैयार समाधान नहीं, आपके विश्लेषण की जाँच के मानदंड हैं।

पहला भाग एक बार बिना लिखे सुनें। दूसरी बार तीन खाने बनाएँ: पत्र लिखने वाला, पत्र पाने वाला और बताई गई परिस्थिति। किसी नाम या संबंध का पता न चले तो अनुमान भरने के बजाय ‘अभी स्पष्ट नहीं’ लिखें। जिस वाक्य से पहचान मिली, उसका समय नोट करें।

इस अभ्यास के लिए उपयोगी शब्द

संबोधन
किसी व्यक्ति को पुकारने या उससे बात शुरू करने का ढंग
प्रेषक
पत्र भेजने वाला व्यक्ति
प्रसंग
किसी कथन को समझने के लिए आवश्यक आसपास की स्थिति

अपने विश्लेषण की जाँच करें

आपने वक्ता और संबोधित व्यक्ति की पहचान कैसे की?

जाँच का आधार देखें

केवल नाम लिखना पर्याप्त नहीं है। संबोधन, सर्वनाम या किसी संबंध का संकेत दें और उसके पास का समय लिखें। जहाँ पहचान अधूरी है, उसे अधूरा ही रखें।

कौन-सी बात पत्र के रूप को स्पष्ट करती है?

जाँच का आधार देखें

सुनाई दिए संबोधन, सीधे प्रश्न या सामने वाले व्यक्ति से की गई बात का उदाहरण दें। रिकॉर्डिंग का एक भाग अपने-आप में एक पूरा पत्र है, ऐसा न मानें।

सारांश में किस बात को शामिल नहीं करना चाहिए?

जाँच का आधार देखें

अपनी कल्पना से जोड़ी गई घटना या अभी न सुना हुआ उत्तर शामिल न करें। सारांश में इस भाग की सुनी हुई जानकारी ही रखें।

पाठ पर विचार करें

किसी पात्र के शब्द और लेखक की राय एक ही चीज़ नहीं हैं। पत्र में व्यक्त विचार को पहले उसी वक्ता से जोड़ें। आगे के भाग सुनते समय यह छोटी सावधानी अलग-अलग दृष्टिकोणों को मिल जाने से बचाएगी।

आपका लेखन अभ्यास

चार वाक्यों का श्रवण नोट बनाएँ: वक्ता के बारे में एक, संबोधित व्यक्ति के बारे में एक, परिस्थिति के बारे में एक और अभी अनुत्तरित प्रश्न के बारे में एक। हर निश्चित कथन के पीछे एक सुना हुआ संकेत होना चाहिए।

अंतिम जाँच: क्या वक्ता की पहचान स्पष्ट है? क्या प्रमाण का भाग और समय दिया है? क्या अपने अनुमान को अनुमान ही लिखा है? अधूरी जानकारी के लिए काल्पनिक घटना न जोड़ें।

स्रोत और वाचन

रचना: प्रेमचंद (1880–1936), दो सखियाँ।

वाचन: Sonali Ekka। रिकॉर्डिंग: LibriVox।

मूल पुस्तक का स्रोत पृष्ठ खोलें

LibriVox अपने रिकॉर्डिंग संग्रह को सार्वजनिक डोमेन में जारी करता है और व्यावसायिक पुनः उपयोग की अनुमति बताता है। उसके अधिकार-संबंधी पृष्ठ पर भौगोलिक दायरे का विवरण है।

LibriVox का सार्वजनिक-डोमेन वक्तव्य

यह मार्गदर्शिका और इसके अभ्यास BookAud की स्वतंत्र रचना हैं। मूल ध्वनि-रिकॉर्डिंग में बदलाव नहीं किया गया है।

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