मोटेराम जी शास्त्री — संवाद में स्वर और अर्थ

एक ही वाक्य का प्रभाव बोलने के ढंग और आसपास के संवाद से बदल सकता है। इस अभ्यास में पाठ के शब्द और पाठक के स्वर को अलग-अलग समझना है।

हिंदी में सुनें

रचना: मोटेराम जी शास्त्री। लेखक: Premchand। वाचन: Sonali Ekka। अवधि: 00:16:01।

यह रिकॉर्डिंग संग्रह की एक अलग रचना है; यह पूरे बहुभाषी संग्रह का ऑडियो नहीं है। नीचे दिया अभ्यास BookAud ने अलग से तैयार किया है।

LibriVox की मूल सूची और रिकॉर्डिंग

सूची में दिया गया स्रोत पाठ

सुनने की विधि

  1. पहले बिना नोट बनाए रचना का एक हिस्सा सुनिए।
  2. फिर नीचे दिया अभ्यास करते हुए दोबारा सुनिए।
  3. जहाँ जरूरत हो, रोककर समय-चिह्न लिखिए।

आज का अभ्यास

दो छोटे संवाद चुनिए। पहले उनके शब्द लिखिए, फिर स्वर के बारे में अपनी टिप्पणी जोड़िए: तेज, धीमा, ठहरा हुआ या बदला हुआ।

अपनी समझ की जाँच

आपके अर्थ-निर्णय का आधार शब्द हैं या आवाज़? दोनों हों तो अलग-अलग बताइए।

उत्तर तैयार करने का संकेत

रिकॉर्डिंग का पाठक पात्र को आवाज़ देता है; पाठक और पात्र एक व्यक्ति नहीं हैं। दूसरी प्रस्तुति सुनने पर स्वर बदल सकता है, जबकि शब्द वही रह सकते हैं।

अभ्यास का परिणाम

अंत में तीन से पाँच वाक्यों की टिप्पणी लिखिए। हर मुख्य बात के साथ रिकॉर्डिंग से एक समय-चिह्न जोड़िए। अपनी राय को पात्र के कथन या कथावाचक के वर्णन से अलग रखें। किसी अंश का अर्थ न समझ आए तो उसे प्रश्न के रूप में लिखिए; अनुमान को तथ्य न बनाइए।

श्रेय और स्रोत

लेखक: Premchand। पाठक: Sonali Ekka। प्रदाता: LibriVox। रिकॉर्डिंग में बदलाव नहीं किया गया है। स्रोत सूची में सार्वजनिक डोमेन का उल्लेख है; BookAud की अभ्यास-सामग्री अलग है।

LibriVox की उपयोग संबंधी जानकारी

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