आवाज़ में भाव सुनाई दे सकता है, पर किसी पात्र की मनःस्थिति बताने के लिए उसके शब्द भी महत्त्वपूर्ण हैं। तीसरे सत्र में अपनी पहली प्रतिक्रिया और पाठ से मिलने वाले संकेत अलग रखें। इससे भावनाओं का वर्णन अधिक सटीक होगा और एक ही अंश की वैकल्पिक व्याख्या भी दिखाई देगी।
यह आठ सत्रों की श्रृंखला का सत्र 3 है। इसमें मूल रिकॉर्डिंग के भाग 3 शामिल हैं। यह अकेला सत्र पूरी पुस्तक नहीं है। तेरह मूल भाग आठ सत्रों में क्रम से शामिल हैं; सभी भाग स्रोत पृष्ठ पर भी उपलब्ध हैं।
रिकॉर्डिंग और स्रोत
वाचन: Sonali Ekka. इस सत्र की रिकॉर्डिंग: 6:52.
भाग 3
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सुनने का उद्देश्य
पहली बार समग्र अर्थ के लिए सुनें। दूसरी बार समय सहित नोट बनाएँ। लंबे अंशों में विराम लें। उत्तर का प्रमाण जाँचने के लिए संबंधित स्थान दोबारा सुनें। नीचे के उत्तर किसी अज्ञात घटना का तैयार समाधान नहीं, आपके विश्लेषण की जाँच के मानदंड हैं।
तीसरा भाग सुनते समय दो ऐसे स्थान चुनें जहाँ भाव बदलता हुआ लगता है। पहली बार केवल अपना प्रभाव लिखें। दूसरी बार इच्छा, असहमति, संदेह या संबोधन जैसे शब्द-संकेत खोजें। दोनों स्थानों के समय लिखें और देखें कि आपकी पहली व्याख्या अब भी टिकती है या बदलनी चाहिए।
इस अभ्यास के लिए उपयोगी शब्द
- मनःस्थिति
- किसी समय व्यक्ति के मन की भावनात्मक स्थिति
- संकेत
- वह विवरण जो किसी अर्थ की ओर ध्यान दिलाता है
- व्याख्या
- किसी बात के अर्थ को समझाने का प्रयास
अपने विश्लेषण की जाँच करें
आपके भाव-वर्णन का आधार क्या है?
जाँच का आधार देखें
एक स्पष्ट शब्द-संकेत और उसका संदर्भ दें। ‘मुझे ऐसा लगा’ उपयोगी आरंभ है, लेकिन उसे पाठ का निश्चित तथ्य न बनाएँ।
क्या वही अंश किसी और तरह समझा जा सकता है?
जाँच का आधार देखें
कम-से-कम एक दूसरी संभावित व्याख्या लिखें। फिर बताएँ कि उपलब्ध शब्द किस व्याख्या का अधिक समर्थन करते हैं या निर्णय क्यों खुला है।
पाठक की आवाज़ और पात्र की भावना में क्या अंतर है?
जाँच का आधार देखें
रिकॉर्डिंग एक पाठ-प्रस्तुति है। बोलने की गति या उतार-चढ़ाव सुनने में मदद करते हैं, लेकिन पात्र के इरादे का स्वतंत्र प्रमाण नहीं हैं।
पाठ पर विचार करें
भावना का नाम देना और उसका कारण सिद्ध करना अलग काम हैं। यदि कोई अंश दुख जैसा लगे, तो उसके पीछे कोई घटना स्वयं न गढ़ें। पाठ जितना बताता है, उत्तर की सीमा भी उतनी ही रखें।
आपका लेखन अभ्यास
दो छोटे अनुच्छेद लिखें, प्रत्येक चुने हुए स्थान पर एक। उनमें समय, संभावित भावना, शब्द-संकेत और एक वैकल्पिक अर्थ शामिल करें। अंत में लिखें कि दोबारा सुनने से आपकी समझ में क्या बदला।
अंतिम जाँच: क्या वक्ता की पहचान स्पष्ट है? क्या प्रमाण का भाग और समय दिया है? क्या अपने अनुमान को अनुमान ही लिखा है? अधूरी जानकारी के लिए काल्पनिक घटना न जोड़ें।
स्रोत और वाचन
रचना: प्रेमचंद (1880–1936), दो सखियाँ।
वाचन: Sonali Ekka। रिकॉर्डिंग: LibriVox।
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LibriVox अपने रिकॉर्डिंग संग्रह को सार्वजनिक डोमेन में जारी करता है और व्यावसायिक पुनः उपयोग की अनुमति बताता है। उसके अधिकार-संबंधी पृष्ठ पर भौगोलिक दायरे का विवरण है।
LibriVox का सार्वजनिक-डोमेन वक्तव्य
यह मार्गदर्शिका और इसके अभ्यास BookAud की स्वतंत्र रचना हैं। मूल ध्वनि-रिकॉर्डिंग में बदलाव नहीं किया गया है।